हिमाचल में रोजगार का प्रश्न

हिमाचल जैसे विकासशील राज्य में रोजगार का प्रश्न बराबर चर्चा में रहा है| भिन्न अवसरो पर सत्ता मे आई पार्टियों ने इसे चुनावी घोषणा का हिस्सा बनाकर भुनाने की कोशिश भी की है| ऐसे में अभी तक प्रदेश में आठ लाख से अधिक बेरोजगारो की मोजूदगी आम चिंता का विषय हो सकती है| पिछले वर्ष तक यह संख्या करीब सात लाख थी, लेकिन इस समस्या को सियांसी बहस का मुद्दा बनाने की बजाय व्यवहारिकता की द्र्ष्टि से देखा जाना आवश्यक है| हिमाचल विधानसभा में भाजपा विधायक दामोदर दास ने एक गैर सरकारी संकल्प प्रस्तुत करते हुए प्रदेश के रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत बेरोजगारो को बेरोजगारी भत्ता देने की माँग की है| ऐसा करते हुए उन्होने राज्य सरकार पर जनता को गुमराह करने का आरोप भी लगाया है| प्रदेश में बेरोजगारों की बढ्ती हुई संख्या को लेकर आम सहानुभूति हो सकती है,लेकिन यहां इस मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कि इस राय से सहमत हुआ जा सकता है कि समस्या का वास्तविक हल बेरोजगारों को रोजगार दिलवाना है| यह भी कि यदि प्रदेश में पंजीकृत 4.86लाख बेरोजगारों को पांच सौ रुपय मासिक के हिसाब से भता दिया जाए तो उससे सरकार पर हर साल 291.67 करोड रुपए का अतिरिक्त बोझ पडेगा| प्रदेश सरकार इसे उठाने की स्थिति में नही है| असल में ऐसे मामलों में दिक्कत तब आती है, जब कुछ पार्टियां अपने चुनावी घोषणा पत्रों में मतदाताओं को रिझाने के लिए इस तरह के लोक लुभवान वादे परोसती है| किंतु सता में आने के बाद में इन्हे पूरा नही कर पाती| इस कारण जनता में असंतोष उपजता है| रोजगार के मामले में स्थिति कुछ भिन्न है| अन्य प्रदेशो की तरह यहां भी बेरोजगारों की तरफ सहानुभूति से गौर किया जाना चाहिए| हालांकि कुछ लोग बेरोजगारी भते को इसका एक उपाय मानते है| ऐसे लोगों की भी कमी नही है, जिनकी राय में भले से कहीं अधिक रोजगार उपलब्ध करवाना जरुरी है| मुख्यमंत्री के कथानानुसार यदि राज्य सरकार गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों में से किसी एक को नौकरी दे पाती है,तो उसे एक उपलब्धी स्वीकार किया जाएगा| इस वादे की फूर्ती सरकार को ही करनी है| सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि बेरोजगार व्यक्तियों को प्रदेश के उद्योगों में प्रयाप्त रोजगार मिल पाए और उन्हें स्वरोजगार के प्रति भी प्रोत्साहित किया जा सके| केवल आँकडों के बल पर ऐसे दावों को नकारना या उन्हे सही साबित करना तर्कसंगत नही है| यदि सरकार 33 हजार बेरोजगारों को सरकरी क्षेत्र में नौकरी देने की बात कर रही है तो इसे पूरा भी करना होगा |{दिव्य हिमाचल से साभार}

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