हिमाचल में जंगली सूअर व नील गाय को मारने पर हटेगा प्रतिबंध

सत्र के दौरान विधायक महेंद्र सिह द्वारा नियम 63 के तहत प्रस्तुत चर्चा का उतर देते हुऐ मुख्यमंत्री वीरभद्र सिहं ने कहा कि यह खेद का विषय है कि जिस देश में पशुओं की पूजा की जाती थी, उसे उस समय घरो से बाहर निकाल दिया जाता है, जब वे नकारा हो जाते है| वह दिन दूर नहीं है, जब मानसिक परिवतन के चलते लोग अपने बूढे मां बाप को घरों से निकाल दें |
राज्य सरकार जंगली सूअरों व नील गाय को मारने पर लगे प्रतिबंध को को हटा दिया जाएगा | आवारा पशुओं की समस्या पर काबू पाने के लिए तीन हजार की क्षमता वाले तीन गौ सदन निर्मित किए जाएंगे | विकास में जन सहयोग में जो गौ सदन बनाना चाहेगा, उसे सरकार सहायता देगी | पशुओं की गिनती की जाएगी तथा उनका पंजीकरण किया जाएगा | मुख्यमंत्री ने इस आरोप को निराधार करार दिया कि शिमला से बंदरों को पकड कर राज्य के अन्य हिस्सो में छोडा गया है |
सरकार प्रयास करेगी कि वनो में जंगली जानवरों के लिए आहार उपलब्ध करवाने हेतु पौधे लगाएं | इससे पूर्व नियम 63 के तहत मामला उठाते हुए विधायक महेंद्र सिह ने कहा कि जंगली जानवरो के कारण प्रदेश की 53 प्रतिशत फसलें बरबाद हो रही है, जिस प्रदेश में किसानों के पास पांच बिसवा जमीन से कम हो तथा जहां जंगली जानवरो का आतंक हो, वहां किसानों का जीना कठिन है ! बंदरों का निर्यात रुकने के कारण बंदरों तथा लंगूरो की संख्या चार लाख से अधिक हो चूकी है | परिणामस्वरुप प्रदेश के किसान तथा बागबान असुरक्षित है | विधायक महेंद्र सिह की मांग थी कि प्रदेश में बंदरों, सूअरों, नील गाय तथा आवारा पशुओं के निवारण के लिए ठोस नीति का निर्धारण किया जाए |

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